Category Archives: Networking

this categories in include Networking related post and tutorial

Data Communication Mode या Data Transmission Mode क्या है !

यदि आप Computer science के Students है ! या Network या Computer में रूचि रखते है ! तो आप ने Data Communication Mode या Data Transmission Mode के बारे में जरूर पढ़ा या सुना होगा और यदि आपके लिए यह शब्द नए है और इनके बारे में आप को जानकारी नहीं है तो इस लेख को पढ़ने के बाद इस Topic से Related आपको बहुद ही विस्तृत जानकारी इस लेख में मिलेगी दोस्तों आप अगर Computer या Network के बारे अधिक से अधिक जानना या Study करना चाहते है तो आप को Data Transmission Mode के बारे में जरूर सुनने या पढ़ने को मिलेगा ! तो इसको समझना आपके लिए आवश्य्क है ! Data Transmission को मुख्य्तः 3 (Category)भागो में विभाजित किया गया है! और इन तीनो Category को छोटे छोटे भागो में भी भाजित किया गया है जिसको निचे दिए गए चार्ट से आप समझ सकते है

transmission mode

कुछ सरल परिभाषा है जिनकी निम्न प्रकार से व्याख्या है

Continue reading

Advertisements

Transmission media/Medium क्या हैं और यह कितने प्रकार के होते हैं !

दोस्तों आज हम Transmission Medium ( संचरण माध्यम) के बारे में विस्तृत चर्चा करंगे और यह समझने और जानने का प्रयास करेंगे की Transmission Medium क्या हैं ! यह कितने प्रकारका होता हैं ! और आज के इस आधुनिक Digital युग में कितने प्रकार के Transmission Medium प्रचलित हैं ! Transmission medium को यदि हम सरल भाषा में समझने का प्रयास करे तो यह कह सकते हैं हैं की ऐसा कोई भी माद्यम (medium)जिसके द्वारा दो उपकरणों(Device) को आपसमे Connectivity दी गई हो और वो एक दूसरे के साथ अपने Resource या Data को आपस में Share कर सकते हो उसको Transmission medium कहा जाता हैं यह माद्यम कुछ भी होसकता हैं Wire less या Wire base ,Transmission medium को 2 भागो में विभाजित किया गया हैं ,Wireless और Wire-based

transmission medium

Wire-based Transmission media / Medium -(तारआधारित संचरण माध्यम )

Wire -Base Transmission Medium जैसा की नाम से ही स्पष्ट होता हैं की यह एक तार आधारित Connectivity हैं ,इनमे उन सभी Entity को रखा गया हैं जिसमे दो Device की Connectivity को Physically देखा जासकता हैं ! Touch किया जासकता हैं ! इसको मुख्य रूपसे 3 भागो में विभाजित किया गया हैं जो इस प्रकार हैं

Twisted Pair

Twisted pair एक ऐसी Wire होती हैं जिसमे दो Wire आपस में एक दूसरे को twisted (मुड़ी) किये हुए होती हैं ! यह Wire सामान्यत Landline Telephone या internet Connection Cable RJ45 में देखने को मिल जाती हैं ! Twisted Pair Cable को 2 भागो में विभाजित किया गया है ! , 1. Shielded Twisted pair और 2. Ushielded twisted Pair

Continue reading

TCP और UDP Protocol क्या है|

दोस्तों TCP और UDP “TCP /IP Model” और “OSI Model” में यूज़ होने वाली एक Protocol है | यह TCP /IP Model में Host to Host Layers पर Work करती है | और OSI Model में यह Layer 4th यानि की Transport Layer पर Work करते है | TCP और UDP का पूरा Name Transmission Control Protocol और User datagram Protocol है इन दोनों Protocol को हम विस्तार से समझेंगे और इनके बीच के अंतर को जानेंगे TCP और UDP दोनों ही Protocol आज के समय में Popular है और दोनों ही Protocol के अपने-अपने Week और Strong point है | इसके अंतर को जानने के लिए इसकी कुछ Functionality में हम अंतर क सकते है | जैसे दोनों Protocol अपना Connection किस प्रकार से Set करती है दोनों ही Protocol की Data को Transfer करने की क्या Speed रहती है | यह Protocol कितनी Reliability पर work करती है | दोनों ही Protocol को यूज़ करने वाले Data Packet का Structure किस प्रकार होता है |

TCP (Transmission Control Protocol )

TCP Protocol एक Connection Oriented Protocol है |  Connection oriented से आशय data को Transfer करने से पूर्व यह Protocol Connection को पूरी तरह से Verify करता है की Receiver device से Connection establish हुवा है या नहीं  इस Process में Clint Server को एक request करता है जिसको Syn कहा जाता है| Response के तोर पर Server Client  को एक request करता है जिसको Syn acknowledgement  कहा जाता है ! !TCP Protocol में इस Functionality को Hand shaking

Continue reading

TCP/IP model क्या है ! Internet के Work करने का Fundamental क्या है !

TCP/IP Model एक Open Standard network protocol है ! जिसका पूरा Name Transmission Control Protocol/Internet Protocol model दोस्तों मेने अपने पिछले Article में बात की थी ,की OSI model क्या है ! इसको क्यों बनाया गया और वर्तमान में इसका क्या उपयोग किया जाता है ! और यह क्यों एक Reference model के तोर पर जाना जाता है ! दोस्तों एक तरह से OSI Model और TCP /IP Model को काफी अच्छे से समझना एक तरह से Internet की Fundamental Working को ही समझना है इसी लिए इस लेख का नाम दिया गया है ! Internet के Work करने का Fundamental क्या है !   इस लेख में हम बात करते है की OSI Model और TCP IP Model में क्या Difference है ! परन्तु इससे पहले हम कुछ Short information जान लेते है TPC /IP model के बारेमें  TCP / IP Model को OSI model के दौरान ही अलग अलग Agency द्वारा Establish कर लिया गया था इसको संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग की एक एजेंसी, DARPA ने 1970 में इसे बनाया गया था   TCP/IP Model एक Guide line जारी करता है जिसको Same to same Followकरते हुए कम्पनिया अपने Computer Network Device और Network hardware बनाती है जिससे Different Different कम्पनियो के Computer network और Network Hardware आपस में Communicate कर सकते है !TCP /IP Model में 4 लेयर है ! 1st Application layer ,2nd Host to Host layer ,3rd Internet Layer ,4th is Network access layer दोस्तों TCP /IP Model की Working को याद रखने के लिए OSI model को पढ़ना बहुद ही आवश्य्क है क्यों की यह इसकी चारो Layers में वही Same to same Functionality होती है जो OSI model की 7 layers में होती TCP /IP अगर वास्तव में देखा जाये तो इसकी Working OSI model के समान ही है Only इसमें कुछ लेयर्स के को मिला कर दूसरा Name दे दिया गया है

TCP IP model

(Note- OSI Model की 7th Layers के बारे में पहलेसे ही एक Detail में Article लिखा जा चुका है उस Article को पढ़ने के लिए यह Click करे )

Network access layerदोस्तों हमने मेरे पिछले लेख OSI model में मेने OSI model की दोनों Layer 1st is Physical Layer and 2nd layer Data Link layer के बारे में बहुद ही Deep में पढ़ा है ! यहाँ TCP /IP Model में Network access Layer वही काम करती है जो OSI model में दोनों Layer मिलकर काम करती है ! यानि Physical addressing से लेकर Data को encapsulation करना इसमें सामिल होता है इसको हम कह सकते है की वो सभी Functionality जो OSI Model में Physical layer और Data link Layer के द्वारा की जाती है वो यहाँ TCP /IP Model में की जाती है

Continue reading

OSI Model क्या है ? यह क्यों establish किया गया Present में इसका क्या उपयोग है ?

OSI Model का पूरा Name Open System interconnection है ! यहाँ Open System Interconnection से मतलब है की जो भी Network hardware Company अपना कोई भी hardware develop करेगी  जो Company OSI model को Follow करते हुए अपने Network Hardware Develop करेगी उनके Devices आपस में Connect हो सकेंगे ! OSI model आने से पहले जो भी Hardware Company जब कोई Hardware बनाती तो वो उसमे अपने द्वारा ही बनाये गए Network Standard और Protocol को यूज़ करते थे जिससे Only उसी Company के द्वारा बनाये गए Hardware Connect हो सकते थे और जब कोई IT Company अलग-अलग Wanders से Hardware ख़रीद लेती तो उसको आपस में Computer को interconnect करने में परेशानी होती थी इसी समस्या के Solution के लिए एक ऐसे Network Standard की आवस्य्क्ता महसूस हुई की वह किसी भी प्रकार के Hardware से Connect हो सके ! OSI Model को ISO( International standardized Organization )ने 1984 में Publish किया गया  जबकि इसको 1977 में establish कर लिया गया था  ISO ने एक कमेटी बनाई और उसको यह Responsibility दी गई की एक Open Standard Develop किया जाये और इसी कमेटी के Reference से 1984 में OSI Mobel को Approve किया गया  और जब से OSI model बना है तब से लेकर आजतक हर Company इसको Follow करते हुए अपनेComputer Network Hardware बना रही है ! यह एक Reference model है !इसके Reference को ध्यान में रखकर ही कम्पनिया अपने Device Develop करती रहेगी हालाँकि आज कल जो हम Network device या Computer को जो यूज़ करते है उनकी Working इसके ऊपर नहीं होती है ! हम जो आज Networking Device यूज़ करते है उनकी Working में TCP /IP Model यूज़ होता है ! OSI model के Reference से Network की Understanding बहुध ही अछि तरह से होती है   इस Model का उद्देस्य Network की traveling को समझना है ! अर्थात Network में data को एक Node से दूसरे Node तक जाने में किस तरह की यात्रा करनी पड़ती है ! हम अन्य सरल सब्दो में कह सकते है की OSI Model एक Complex Network task को 7 Parts में divide कर देता है जिसको समझने में बहुध ही आसानी होती है OSI Model में 7 Layers होती है ! जिसमे हर Layer का अपने आप में यूनिक work होता है जिसको यहाँ हम विस्तार से समझेंगे यह 7 layer  receiver से Sender की तरफ और Sender से Receiver की तरफ दोनों तरफ होती है

osi model in hindi

Classification of OSI Model

OSI Model के reference में Network की एक Complex task को 7 parts में divide किया जिसमे Network को आसानी से समझाजा सकता है इसलिए इसको Teaching model के नाम से भी जाना जाता है! osi model में 1st layer Physical Layer है 2nd Data link Layer, 3rd Layer Network layer ,4th Layer Transport layer ,5th session Layer ,6th Presentation Layer , 7th Application Layer है  इन 7 layers को OSI Stack भी कहते है ! इस Model को 2 parts में Divide किया गया है

Continue reading

Cisco क्या है ? एक Cisco Certify Network Engineer या Administrator बनने का क्या Process है !

दोस्तों आप यदि Computer या IT Fields से है तो आपको Networking के बारे में जरूर थोड़ा या बहुद Knowledge होगा और यदि आप Computer  या IT Fields से नहीं है तो भी आपको यह लेख (tutorial) जरूर पढ़ना चाइये ताकि आप सायद कुछ नया जानपाए Networking  के बारे में और अपने Knowledge को बडा पाए ! दोस्तों Network की दुनिया में Cisco का एक बहुध ही बडा अहम role है ! Cisco Networking Fields की एक बहुद बडी अमरीका की Multinational Company है ! जो Networking में काम आने वाले बहुद ही उच्य कोटि के (High Level Hardware जिनमे Operating System होता है और Commands Interface से Configuration होता है ) Hardware Switch ,Router और Hub बनाती है और उनमे चलने वाले Operating system और Networking से Related Software बनाती है ! Cisco ने Network Engineering के Level के अनुसार Certificate  Level बना रखे है ! जिन Certificate  Level को  Clear करने के बाद  कोई भी अपना एक अच्छा Career बना सकता है Networking Fields में और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है की अभी तक आपका Study background क्या रहा है! आप  Cisco के Certify course Level को pass करके एक Network Engineer बन सकते है यदि आपको Networking में रूचि है और आपको Networking सीखने का जनून है !  इससे पहले हम Network Engineering के बारे में कुछ विस्तार से जाने Cisco के बारे में कुछ बाते जान लेते है what is Cisco in hindi

Cisco World  की एक बड़ी network Company है इसका headquarter San Jose, California America में है ! यह Company High Networking hardware और Telecommunications Equipment बनती है ! Cisco के साथ कही सहायक कम्पनिया मिली हुई है जैसे -OpenDNS ,WebEx ,Cisco Jasper जिनकी IT market में अपने आप में Unic Service औरी identity है ! इसकी वजह से Technology के market मेंCisco की एक अलग ही पहचान है Cisco Company की स्थापना 1984 में (Leonard Bosack)लियोनार्ड बोसैक और(Sandy Lerner) सैंडी लर्नर द्वारा की गई थी, यह दोनों (Stanford University)स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के कंप्यूटर वैज्ञानिक और Husband Wife थे |

About Cisco Certification

Cisco ने अपने द्वारा बनाये गए Networking Hardware को Operate करने के लिए अनेक Certification level बना रखे है ! और इसमें More Then 50 -60 तरह के Certification जारी किये जाते है  जिनसे अलग-अलग तरह के Network Administrator बनते है !

Networking Level

Network Engineer बनने का क्या Process है |

एक Network Administrator बनने के लिए आप को Networking की सबसे बुनियादी बाते जानना आवश्य्क होती है जैसे Network Topology Types of Network LAN , (Local aria Network ) MAN (MetroPoli Aria Network ) WAN (Word Aria network ) PAN (Personal Aria Network ) SAN ( Storage Aria network ) CAN Continue reading

I P Address क्या होते है ?

हेल्लो दोस्तों आज हम जानते हे की IP Address (Internet protocol address )  होता क्या हे और ये कैसे किसी system या Devise पर work करता है! IP Address किसी भी device का एक Networking पता होता है जिसके through वह Network को एक्सेस करता है और उस Devices को Verify करता है कीNetwork or internet से connected है एक तरह से हम यह भी कह सकते है की IP Address उस अमुक उपकरण(devices) का Address होता है जो किसी internet या Network को access कर रहा होता है  IP address  नेटवर्क पर विशेष Device  के लिए डेटा भेजने के लिए Network से Connected प्रत्येक Device -जैसे, कंप्यूटर, सर्वर, प्रिंटर, स्मार्टफ़ोन का एक यूनिक एड्रेस होता है और Communication  के लिए Internet protocol  का उपयोग करते हैं।

ip address

IP Address मुख्य रूप से दो प्रकार के होते है 1 logical IP address और 2  physical IP address Logical IP address हमेसा बदलता रहता है यह dynamic होता है परन्तु Physical IP address static होता है ये world में किसी भी devise के लिए यूनिक रहता है ! हालाँकि hacking के वक्त hacker अपना Physical IP address change कर दे ते है  Physical IP Address को Make Address के नाम से भी जाना जाता है

1 = Logical IP Address के बारे में

Logical IP Address में IPV4 और IPv6 format हो ता है IPv4 India में currents में use होता है India में कुछ company है IPv6 पर Work करती है पर most-off IPv4 पर ही काम चलता है और अभी ये ही popular है परन्तु विदेश में जापान ,कोरिया ,अमेरिका ,काफी समय से IPV6 पर काम कर रही है ! IPV6 आने का मतलब ये नही की ipv4 बन्द हो जायेगा ये कभी बन्द नही होये गा ip address की Digit भविष्य में ख़तम हो सकती है ऐसी आसंका में IPV6 का अविष्कार हुवा है!

IPv4

IP4 में 4 digit होती है जिसको Point के बाद हर Digit ओक्टेट के नाम से जाना जाता है उदारणत: 192.168.23.4 ये एक ipv4 का IP Address है यह एक  सामान्य उदाहरण है। सबसे आसानी से पहचाने जाने वाली आईपी रेंज 192.168.0.1 – 192.168.0.255 हैं, क्योंकि इन एड्रेस को हम घर या ऑफिस कॉलेज आदि पर उपयोग करते हैं| IPV4  32 Bit का होता है! यह IP Address मुख्य रूप से 5 Class में divide होता है A ,B ,C ,D .E जिसमे D और E Class reserve होती है इनको publicly use नही किया जाता है IPV4 के हर Address के साथ सबनेट मास्क (Subnetmask ) जुड़ा होता है जिसको देख कर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है की कोनसा एड्रेस Host Address और कोनसा Network Address है और broad cast address है इसके बारे में हम next Tutorial में पढ़ेंगे की कैसे IP Address का Binary conversion किया जाता है और उनको छोटे पार्ट्स sub network में कैसे किया जाता है Subset mask के through

NO Number of Class      Discretion about IP address
1 CLASS A (0-126)    exp. 10.22.23.7   submit mask (255.0.0.0)
2 CLASS B (127-191) exp. 132.15.29.7  submit mask (255.255.0.0)
3 CLASS C (192-223) exp.193.123,142,10  submit mask  (255.255.255.0)
4 CLASS D (224-239) this ip is used in gaming and multi-casting area
5 CLASS E (240- 255)  this ip is reserve in research area

(note-Windows operating System में अपना Ip address देख ने के लिए Follow करे Windows + R key  >just type in Run windows >Cmd  then command prompt open Command prompt में टाइप करे >ipconfig )

IPv6

IPv6 Internet Engineering Task Force द्वारा बनाया गया है यह IPv4 के साथ भी Work करता है  IPV6 भविष्य के लिए reserve हैIPv6 128 बिट्स लंबा होता हैं। इसलिए, यह 2 ^ 128 इंटरनेट एड्रेस को सपोर्ट करता हें, जो 340.282.366.920.938.000.000.000.000.000.000.000.000 एड्रेस के बराबर हैं|यह एक इतना बड़ा IP Address होता है की World के हर person को लगफग 20,000 IP address मिल सकता है तो इसके Digit के कम पड़ने का सवाल ही नही उठता है यह बहुत सारे address  हैं और वे बहुत लंबे समय तक internet  operation  जारी रखने के लिए पर्याप्त से अधिक हैं।जहा IPv4 point के through 4 डिजिट Group  में define किया जाता है वही IPv6 hexadecimal number में 8 group में define या Represent किया जाता है

IP address

1.Global prefix= यह part 3 group से मिलकर बना होता है इसका यूज़ रूटिंग में किया जाता है

2.subnet इसमे एक Number होता है जो sub network को identify करने में लिया जाता है

3.Interface id =यह host network को unicycle identify करती है ये 4 Group से मिलकर बना होता है

इसके साथ ही IPv6  अपने आप में IPv4 से भी ज्यादा कही features को Include करता है जो IPv4 से कही गुना बहतर है इसके ऊपर जल्द ही हिंदी आईटी सलूशन द्वारा  पूरा विस्तृत tutorial publish किया जाये गा

2= Physical IP Address / make address के बारे में

Physical IP address को Mack Address के नाम से भी जाना जाता है यह वर्ल्ड की हर device का एक unique IP Address होता है यह पूरी तरह से static ip address हो ता है इसको कभी भी permanently change नही किया जासकता है Windows operating system में mack addressदेखने के लिएcommand promp में /getmac  command का प्रयोग कर देखा जा सकता है

दोस्तों अगर आपको मेरे द्वरा दीगयी जानकारी अछि लगी तो फॉलो करे मेरे ब्लॉग  को में निरन्तर ऐसी नॉलेज वाली पोस्ट जब बी पिब्लिश करुगा आप को मेल मिलजाएगा और इस ब्लॉग पे बहुद ही सरल तरीके से Networking ,windows Linux ,Androud  से रिलेटेड पोस्ट में प्रकाशित करता रहुगा

Thank you

by Vishnu Sharma