Programming Language में Identifiers क्या होते है ?

 (identifiers) आइडेंटिफायर – इसका अर्थ Variable, array ,Function के नाम से होता है identifiers – को हम बहुद ही सरल सब्दो में समझने का प्रयास करते है जब हम किसी भी programming language में कोई भी program develop करते है तो हमे Programming की Coding के माद्यम से Computer memory में Data या निर्देश को input करने की आवश्य्कता होती है जो Computer memory की Location में Store होता है और Computer की Memory में हर Location का एक Unique address होता है और जब हम Programming language के माद्यम से Coding करते है तो वह data Computer की Memory में कही न कही जाकर Store हो जाता है Computer memory में यह data कहाँ जाकर store होता है यह हमारे लिए पता लगना मुश्किल होता है यह काम Operating system के द्वारा अपने आप कीया जाता है परन्तु identifies के माद्यम से हम उस memory location को एक कोई भी Name assign कर सकते है  परन्तु इन मेमोरी location का Name assign करने के लिए हमे कुछ नियमो को ध्यान में रखना पड़ता है क्यों की Programming language Compiler इसके साथ कही प्रकार के operation perform करता है वो नियम कुछ इस प्रकार है जो लग-भग सभी Programming Language पर लागु होते है

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Computer Programming Language को कैसे सीखा जासकता है ?

दोस्तों आज के इस लेख में हम Computer Programming Language की कुछ मुलभुत और छोटी बातो पर चर्चा करेंगे और जानेंगे की किसी भी Programming Language को सीखने के लिए क्या क्या जरूरी चीजे होती है जिनपर Focus कर के Programming language को आसानी से सीखा जासकता है ! चाहें फिर वो कोई भी कोई भी Programming Language हो उनके ऊपर हम बड़ी आसानी से पकड़ बना सकते है ! दस्तो हम जब हम वास्तविकता भी कोई new language सीखते है तो  हम लोगो को बोलते हुए देख कर बोलना सीखजाते है   या अपने आस पास जब दूसरी भाषा के लोग होते है वहाँ का वातावरण ऐसा बन जाता है की हम उनको देख देख कर बोलना सिख जाते है परन्तु हम उस भाषा को लिखना नहीं सिख पाते है कयोकि हमे उसके लिए उस भाषा का व्याकरण ज्ञान होना आवश्य्क है  ठीक उसी तरह हमे Programming language की Grammar का ज्ञान होना आवश्य्क है दोस्तों यहाँ सबसे अछि बात यह है की सभी Programming language की Grammar एक जैसी होती है  यहाँ Programming Language की Grammar से आशय यह है की प्रोग्राम के किस भाग को किसी शब्द विषेस को क्या बोलै जाता है और उसका यूज़ वही क्यों किया जाता है यह सीखना है  अगर आप program में लिखे हर एक शब्द Word को समझना चाहते है तो आपको उसके Grammar की शब्दावली को समझना होगा जोकि सभी Programming Language में एक जैसी होती है  सभी Programming language में हर एक Statement का कुछ न कुछ मतलब होता है और हर एक Statement या block में लिखे गए Word का नाम होता है उन सभी Statement को हम यहाँ विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे

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C Programming क्या है ? और क्यों ठीक से C Programming सीखना आवश्य्क है

हेल्लो दोस्तों आज के इस लेख में हम यह जानते है की C Programming क्या है और क्यों ठीक से C programming सीखना हमारे लिए आवश्य्क होता है दोस्तों C Programming एक Machine programming language है जिसमे Computer या किसी भी machine के लिए Program लिख कर उसको operate किया जा सकता है C programming का आविष्कार 1972 में Bell Laboratories में डेनिस रिची और उसकी Team ने किया था ! C Programming से पहले Computer में Assembly Language में program लिखा जाता था परन्तु इस लैंग्वेज की एक खामी यह थी की Assembly Language में लिखा गया Program उसी Computer पे चलता था जिस पर वो लिखा गया है यानि वो Program दूसरे Computer पर Use नहीं हो सकता था इस समस्या के निवारण के लिए एक ऐसी Language की जरूरत महसूस हुई की वह Platform Independent हो यानि वह किसी भी Computer और Machine पर run हो सके तो इस जरूरत को देख़ते हुए 1960 में केम्ब्रिज युनिवेर्सिटी ने एक ऐसी Programming language का अविष्कार किया जो Platform Independent थी जिसको BCPL (BASIC COMBINED PROGRAMMING LANGUAGE) नाम दिया गया इसके बाद भी इसमें कुछ खामिया थी जिसको 1970 में केन थॉम्पसन ने सही किया इसके बाद इसको B language के नाम से जाना जाने लगा और अन्तत डेनिस रिची ने इसमें काफी कुछ सुधार कर एक Powerful Programming Language बनाई जिसको आज C Language के Name से जाना जाता है

C programming की विशेषता  

  1. C Programming language एक ऐसी Programming language है जिसमे System Software और Application Software दोनों प्रकार के Software बनाये जाते है
  2. कुछ बहुध ही मह्त्वपूण System व् Application Software C में ही Develop किये गए है जैसे windows Linux unix , PHP admin Apache Server MYSQL Data base Networking devise Operating system आदि
  3.  C Language में बनाये गए program Direct Hard ware के साथ भी Deal कर सकते है यानि इसमें बनाये गए Program में किसी Hard Ware की Memory CPU Processor को Directly Assess किया जा सकता है
  4. C Language के Code को सीखना बहुध ही सरल है क्यों की यह Simple English Language में होते है
  5. ज्य्दातर Games ,Video editing software animation Software और Program c language में बनाये जाते है क्यों C program की कार्य करने की गति अन्य Programing Language से काफी तेज होती है
  6. C Programming Direct Hard ware से deal करती है तो इसमें ऐसे खतरनाक Virus भी बनाये जा सकते है जो किसी Devise को हमेसा के लिए सुला दे
  7. यह एक Compiler language है जैसा की हम जानते है की Computer only 0 1 Binary language ही समझता है तो C language में लिखे गए Program को Compile करने की आवश्य्कता पड़ती है compiler C program को machine language o 1 की फॉर्म में Convert कर देता है

C के Compiler के नाम  आप यहाँ से इनको Download भी कर सकते है

Windows platform के लिए Free Compiler

Pelles C ,   lcc-win , TDM-GCC Tiny C Compiler(TCC) , MinGW , Cygwin  , DJGPP 

C Language के लिए   IDE WINDOWS LINUX MAC 

Codeblocks –

Eclipse –

Eclipse CDT –

Netbeans IDE

Editors Linux के लिए

Sublimetext –

Ultraedit –

Geany –

Editors Windows के लिए

Sublimetext –

Notepad++ –

Ultraedit –

Geany –

Editors Mac OS के लिए

Sublimetext –

Ultraedit – 

यहाँ कुछ ऐसी web Site के Link दिए गए है जहाँ आप अपने Program को Online भी run और Compile करा सकते है 

codepad –

compilr.com –

Cloud9 IDE –

क्यों ठीक से सीखना जरूरी है C language 

दोस्तों ऊपर लिखी सभी विशेषता को देखा जाये तो C language आज के आधुनिक युग में भी एक बहुध Power full Language है आज के युग में जहाँ Market में अनेक नई Programming लैंग्वेज का अविष्कार हो रहा है और कुछ Language Programming चलन से बाहर होती जार ही है परन्तु C language वही अपने स्थान पर है C language को लग-भग हर डिग्री Level पर पढाया जाता है B .tec ,BCA MCA या O Level B Level A level इत्यादि और अगर हम C language सिख लेते है तो अन्य किसी भी Programming level को सीखना काफी आसान होता है क्यों की सभी Language के Key word सिन्टेक्स C Language से ही मिलते जुलते है

दोस्तों आगे की Post में हम C language के Program को बनाना Compile करना RUN करना इसके बारे में हम सीखेंगे

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धन्यवाद
लेखक -विष्णु शर्मा

 

 

RedHat Linux Server में Website Apache को Secure कैसे बनाएं

हेलो दोस्तों आज के इस लेख में हम सीखते है की RedHat Linux Server में Website को कैसे Security provide कराई जा सकती है और हम किस -किस प्रकार की Security Hosting के दौरान कर सकते है परन्तु इससे पहले हमे यह जानना होगा की लिनक्स में हम Apache Server कैसे Configure कर सकते है और कैसे Apache Server पर Website को कैसे Host कर सकते है यह जानने के लिए आप इस Link पर click करके देख सकते है

तो दोस्तों यहाँ में यह मानकर चलता हु की आप ने अपनी Linux मशीन में Apache Server Configure कर लिया है और कैसे किसी Website या Web page को Apache Server पर host किया जा सकता है और आपको थड़ी बहुद Hosting के बारे में जाकारी है

इस लेख में आप जानेगे—

Website को Password protract कैसे बनाये ?

Server की Information को Hide करना

Port को Customize करना

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Windows Operating System में कैसे Virtual Environment बनाये बिना किसी Third Party Software के

दोस्तों आज के इस लेख में हम सीखते है की Windows Operating System में हम बिना किसी Third party Software के कैसे Virtual Environment बना सकते है परन्तु इससे पहले हम यह जानते है की Virtual Environment होता क्या है! दोस्तों Virtual Environment में अपने Computer machine को एक ऐसा Environment बनाना होता है जिसमे हम कोई भी कार्य (work )करे परन्तु उसका कोई प्रभाव हमारे Real Operating system पर नहीं पड़े अन्य सब्दो में हम यह कह सकते है की वह  एक आभासी वातावरण (Virtual environment ) रहेगा जिसमे हम कोई भी दूसरा Operating system use कर अपने अनुसार Hard ware Processing Power दे सकते है यानि Windows Operating system में ही एक दूसरा Operating system install करना है  इस काम के लिए अनेक third party software internet पर available है जो कुछ Free है और कुछ paid है जैसे Virtual box ,VMware Work ststionपरन्तु दोस्तों Windows operating system भी by default virtual environment provide करवाता है जिसको Hyper -V Manager के नाम से जाना जाता है यह Windows Machine में by Default Disable रहता है हमे इस Features को on करके use कर सकते है इसके लिए आप को Hindiitsolution द्वारा बताए गए कुछ Simple step को Follow करना है

1 सबसे पहले आप को Hyper -v को enable करना है निम्न Path पर जाकर Control panel >Programs >turn Windows feathers on off  इस पर Click करने पर एक Window open होती है जिसमे से Hyper -v पर Click कर OK करना है इस को OK करने  के बाद यहSystem कुछ Time लेता है On होने में फिर  Computer को restart करना है 

Hyper-V

2. Computer के Restart होने के बाद आप को windows search में Search करना है Hyper-Computer के Restart होने के बाद आप को windows search में Search करना है Hyper-V manager

hyper -v

इसको Click करने पर एक window open होती जिसमे हम कोई भी Operating system install कर सकते है अगर आप को Virtual box या कोई भी third party virtual environment software use किया है तो इसको भी आसानी से कर सकते है या आप पहली बार कोई Virtual environment use कर रहे है तो Hindiitsolution के steps को Follow करे

hyper -v

3. यहाँ तक process Complet होने के बाद हमें Operating system को Install करने के लिए जिस Operating system को हम Install करना कहते है उसकी iso File इस CD /DVD होनी आवश्य्क के हम अपने Source के अनुसार Option Select करना है और Next Select करना है

hyper -v

इस तरह virtual machine की Setting Configure करने के बाद Operating system install कर सकते है और Virtual environment operating system use कर सकते है जिसका कोई भी प्रभाव Real operating system पर नहीं पड़ता है अगर आप को इस Hyper -V के process में कोई समस्या आती है तो आप Comments करके निचे बता सकते है

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लेखक -विष्णु शर्मा

 

Windows Operating System में Virtual Hard Disk कैसे Create की जाती है और इसके क्या फायदे होते है

दोस्तों आज के इस लेख में हम यह सीखते है की Windows Operating System में Virtual Hard disk कैसे Create की जाती है पर इससे पहले हम यह जानते है की Virtual Hard Disk होती क्या  है और इसको Create करने का क्या (Benefit )फायदा होता है दोस्तों Virtual Hard disk Real heard disk से Space लेकर बनती है Hard drive के जिस partition से Space लिया जाता है वहाँ एक File बन जाती है और वो File Hard drive की तरह Work करती है और उस को हम एक Computer से दूसरे Computer में Transfer भी कर सकते है Virtual hard Disk में Data को Store भी कर सकते है और इसमें Partition भी बना सकते है Virtual hard Drive का सबसे बड़ा फायदा यह है की इसमें रखा Data बेहद Safe होता है  और इसमें Data को Store कर Password लगाया जा सकता है और इसके बाद यह Computer को Restart या Shutdown करने पर अपने आप गायब (hide )हो जाती है और फिर user को जब आवश्य्कता पड़े इसको Show कर सकता है Virtual hard disk को Create करने के लिए किसी भी प्रकार के third party Software की आवश्य्कता नहीं पड़ती है इसके लिए Windows operating system में in built  Tools होते है जिसकी सहायता से यह किया जा सकता है आप Hinsiitsolution.com के द्वारा दिखाए गए Screen Short और कुछ सरल Points को देख कर आप बहुध आसानी से यह कर सकते है

  1. सबसे पहले आप को My Computer के Icon पर Right click कर manage Option को Select करना है और जो Window Open होती है उसमे से आप को Disk management Option को Select करना है

virtual heard diskvirtual heard disk

2. यहाँ हमे disk management में देखने को मिलता है real heard drive और उसके partition  की information इन्ही Partition मेंसे किसी एक Partition में एक file बनानी होती है जो Computer के लिए heard drive की तरह Work करती है  यहाँ हमे Action पर Click  करCreate VHD को Select करना है

virtual heard disk

3. यहाँ हमे जिस Partition से virtual heard disk के लिए Space लेना है वो location select करना है और जिस Size की आप Heard drive created करना चाहते है वहsize देनी है  यहाँ हमारी Virtual heard disk की एक File बने गी जो system के लिए Heard drive की तरह work करेगी

virtual heard disk

4. यहाँ Location और साइज देने के बाद OK पर क्लिक करते है तो Virtual disk के लिए File बनना Start हो जाती है

virtual heard disk

5. जब virtual Disk Create हो जाये तो हमे Manage विंडोज को Close कर देना है और फिर एक बार वापस Computer के right Click करते हुए  manage windows को Open करना है Manage Window Open होते ही एक पॉपप (window) Automatic Open हो जाता है वहाँ हमे Gpt या MBR  कोई भी File System Select करना है वैसे MBR File Syatem ज्यादा बहतर रहता है तो यहाँ वही Select किया हुवा है

virtual heard disk

इसके बाद Disk 1 में हमे right Click कर New Volume group को बनाना है यह एक तरह से Virtual Hard drive का Partition होगा

virtual heard disk

virtual heard disk

इसके बाद आप my Computer में जाकर देख सकते है की एक new Partition create हो चूका है इस Partition में हम Data को Store कर के रख सकते है परन्तु यहाँ एक ध्यान देने योग्य बात है की जब हमारा Computer restart या shutdown होगा तब यह partition Hide हो जायेगा इसको हमे वापस Show करने के लिए हमे Mount /attach करना होगा जो की एक सरल Process  है

जिसको Screen Short के जरिये भी दिखाया गया है  इसके लिए हमे Manage विंडोज को Open करना है वहां से Manage Windows option को Select करना है फिर इसके बाद Action पर click कर Attach VHD को Select करना है यहाँ से हमे उस partition में से  वो फाइल सेलेक्ट करनी है जिसको हम ने Virtual Heard drive बनाने के लिए use किया था उसको Select कर ने केबाद Hide Partition Show हो जायेगा

virtual heard drive

तो दोस्तों इस तरह से आप Computer में एक Virtual hard drive create कर सकते है और इसमें अपना कोई भी important या खुफिया data store कर सकते है Computer के Restart या Shut down होने पर यह Hard drive अपने आप Unmount/ Hide हो जायेगा और  और दोस्तों इसमें मजे की बात यह है की हम इसको copy कर दूसरे computer पर भी use कर सकते है और यदि हमे इसको ज्यादा secure बनाना होतो हम इस पर Bit locker का use कर Password भी लगा सकते है

 

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लेखक -विष्णु शर्मा